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विवाह और रिश्ते: ग्रहों का खेल या स्वभाव का मेल?

marriage and relationships

विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो आत्माओं का संगम है। आज के समय में जहाँ रिश्ते कांच की तरह नाजुक होते जा रहे हैं, भगवत प्राप्ति संदेश दर्शन का यह स्तंभ आपको रिश्तों की गहराई समझने में मदद करेगा। हमारा मानना है कि—“भाग्य नहीं, बल्कि सोच बदलेगी”—और रिश्तों में सोच का बदलना ही प्रेम का आधार है।

1. रिश्तों में ग्रहों की भूमिका

ज्योतिष शास्त्र में विवाह का मुख्य कारक ‘सप्तम भाव’ (7th House) और प्रेम का कारक ‘शुक्र’ (Venus) होता है।

  • शुक्र: यदि कुंडली में शुक्र मजबूत है, तो जीवन में प्रेम और विलासिता बनी रहती है।
  • मंगल: मंगल का प्रभाव (मांगलिक दोष) अक्सर स्वभाव में उग्रता लाता है, जिससे आपसी तालमेल में कमी आती है।
  • बृहस्पति: कन्याओं के विवाह के लिए गुरु का शुभ होना अनिवार्य है, क्योंकि यह पति का कारक है।

2. मांगलिक दोष: डर या हकीकत?

समाज में मांगलिक दोष को लेकर बहुत डर फैलाया गया है। डॉ. गौरव सक्सेना के अनुसार, मांगलिक होना कोई अभिशाप नहीं है। यह केवल ऊर्जा का एक विशेष स्तर है। यदि एक मांगलिक व्यक्ति अपनी ऊर्जा को सही दिशा (करियर या सेवा) में लगाए और अपने जीवनसाथी के प्रति थोड़ा लचीला रुख अपनाए, तो यह दोष स्वतः ही कम हो जाता है।

3. ‘कुंडली मिलान’ से ज्यादा जरूरी है ‘मन का मिलान’

अक्सर लोग 36 में से 32 गुण मिला लेते हैं, फिर भी विवाह सफल नहीं होता। क्यों? क्योंकि गुण तो मिल गए, लेकिन विचार (Compatibility) नहीं मिले। ज्योतिष केवल संभावना दिखाता है, लेकिन रिश्ते को निभाना आपके ‘संस्कार’ और ‘धैर्य’ पर निर्भर करता है।

4. रिश्तों में कड़वाहट दूर करने के 3 आध्यात्मिक सूत्र

यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो इन बातों पर गौर करें:

  1. मौन का महत्व: बहस के समय मौन रहना सबसे बड़ा समाधान है।
  2. अपेक्षाओं का त्याग: साथी को बदलने की कोशिश करने के बजाय, खुद में बदलाव लाएं।
  3. नाम जप: घर में साथ मिलकर ईश्वर का नाम जप या कीर्तन करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

5. सुखी दांपत्य के लिए कुछ प्रभावी उपाय

  • शुक्र को बलवान करें: शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करें और घर के ‘आग्नेय कोण’ (South-East) में सफाई रखें।
  • गौरी-शंकर पूजा: पति-पत्नी मिलकर शिव-पार्वती की आराधना करें। यह रिश्तों में संतुलन और समर्पण लाता है।
  • सकारात्मक संवाद: दिन भर में कम से कम 10 मिनट बिना मोबाइल के एक-दूसरे से बात करें।

6. निष्कर्ष: प्रेम ही आधार है

अंततः, कोई भी ग्रह या दोष आपके प्रेम से बड़ा नहीं है। यदि आपके मन में त्याग और सम्मान का भाव है, तो बड़े से बड़ा ‘ग्रह दोष’ भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। याद रखें, रिश्ता एक ऐसी बेल है जिसे रोज विश्वास के पानी से सींचना पड़ता है।

“रिश्ते निभाने के लिए बुद्धि नहीं, हृदय की आवश्यकता होती है।”

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