Home / विशेषज्ञों की राय / ज्योतिष और जीवन: क्या ग्रह सचमुच हमारा भाग्य बदलते हैं या सब हमारी सोच का खेल है?

ज्योतिष और जीवन: क्या ग्रह सचमुच हमारा भाग्य बदलते हैं या सब हमारी सोच का खेल है?

मानव सभ्यता के इतिहास में ज्योतिष सबसे प्राचीन और रहस्यमयी विद्याओं में से एक रही है। अक्सर लोग ज्योतिष को केवल “कल क्या होगा?” जानने का माध्यम मानते हैं, लेकिन भगवत प्राप्ति संदेश दर्शन के दृष्टिकोण से, ज्योतिष स्वयं को जानने और सुधारने का एक गहरा मनोविज्ञान है। जैसा कि हमारा मूल मंत्र है—“भाग्य नहीं, बल्कि सोच बदलेगी”—ज्योतिष इसमें एक मार्गदर्शक (Navigator) की भूमिका निभाता है।

1. ज्योतिष क्या है: अंधविश्वास या विज्ञान?

ज्योतिष (Astrology) का शाब्दिक अर्थ है “ज्योति” यानी प्रकाश का “ईश” यानी स्वामी। यह आकाश मंडल में स्थित ग्रहों और नक्षत्रों की ऊर्जा का हमारे जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन है। जिस तरह चंद्रमा की गति समुद्र में ज्वार-भाटा (Tides) लाती है, उसी तरह हमारे शरीर में मौजूद 70% जल तत्व भी ग्रहों के खिंचाव से प्रभावित होता है।

यह कोई जादू नहीं, बल्कि एक गणना है। जब हम अपनी जन्मकुंडली देखते हैं, तो वह उस समय का “आकाश का नक्शा” होती है जब हमने जन्म लिया था। वह नक्शा हमारे स्वभाव, स्वास्थ्य और हमारे भीतर की संभावनाओं को दर्शाता है।

2. केपी (KP) और नाड़ी ज्योतिष की प्रभावशीलता

आज के समय में केवल सामान्य भविष्यवाणियां काफी नहीं हैं। डॉ. गौरव सक्सेना के मार्गदर्शन में, हमारी पत्रिका कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) और नाड़ी ज्योतिष जैसे सटीक वैज्ञानिक मापदंडों का उपयोग करती है।

  • KP System: यह नक्षत्रों के उप-स्वामियों (Sub-lords) पर आधारित है, जो किसी भी घटना के होने या न होने की सटीक समय सीमा (Timing of Events) बताते हैं।
  • नाड़ी ज्योतिष: यह आपके पूर्व संचित कर्मों और वर्तमान जीवन के बीच के संबंधों को उजागर करती है।

3. ग्रह दोष या केवल कर्मों का फल?

अक्सर लोग ‘शनि की साढ़ेसाती’ या ‘मंगल दोष’ के नाम से डर जाते हैं। ज्योतिष हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि सचेत करने के लिए है। ग्रह केवल हमें इशारा देते हैं।

  • शनि: यह अनुशासन और न्याय का देवता है। यदि आप मेहनती और ईमानदार हैं, तो शनि आपका कभी बुरा नहीं करेगा।
  • राहू-केतु: ये हमारे भ्रम और तीव्र इच्छाओं के कारक हैं। यदि हम अपनी सोच पर नियंत्रण रखें, तो ये ग्रह हमें शोध (Research) और नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं।

4. सोच कैसे बदलती है भाग्य को?

ज्योतिष में ‘उपाय’ (Remedies) का बहुत महत्व है। लेकिन सबसे बड़ा उपाय है—स्वभाव परिवर्तन। मान लीजिए किसी की कुंडली में क्रोध की अधिकता (मंगल का प्रभाव) है। अब लाल कपड़ा दान करना एक प्रतीकात्मक उपाय हो सकता है, लेकिन वास्तविक उपाय ‘ध्यान’ के माध्यम से अपने क्रोध को ‘ऊर्जा’ में बदलना है। जब आपकी सोच बदलती है, तो आप अपने ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम कर देते हैं। यही वह बिंदु है जहाँ ज्योतिष और अध्यात्म आपस में मिलते हैं।

5. सफल जीवन के लिए कुछ सरल ज्योतिषीय सूत्र

अपनी दैनिक दिनचर्या में छोटे बदलाव करके आप अपने ग्रहों को अनुकूल बना सकते हैं:

  1. सूर्य (आत्मविश्वास): प्रतिदिन उगते सूर्य को जल दें और अपने पिता का सम्मान करें।
  2. चंद्रमा (मानसिक शांति): पानी की बर्बादी न करें और अपनी माता का आशीर्वाद लें।
  3. बुध (बुद्धि/व्यापार): पक्षियों को दाना डालें और अपनी बहन/बुआ का सम्मान करें।
  4. बृहस्पति (ज्ञान): बुजुर्गों और गुरुओं की सेवा करें और घर में पीली वस्तुओं का संतुलित उपयोग करें।

6. निष्कर्ष: एक नई शुरुआत

ज्योतिष के माध्यम से हम यह जान सकते हैं कि “बारिश कब होगी”, ताकि हम छाता (उपाय) लेकर तैयार रहें। लेकिन बारिश में भीगने से बचने की सोच और हिम्मत हमें स्वयं जुटानी होगी। आपकी कुंडली की लकीरें पत्थर की लकीर नहीं हैं; वे आपके कर्मों की स्याही से लिखी गई हैं। यदि आप आज अपनी सोच और कर्म बदल लें, तो कुंडली के बुरे योग भी फीके पड़ जाते हैं।

“सितारों से आगे भी जहाँ और भी हैं।” अपनी क्षमता को पहचानें और ज्योतिष को एक बैसाखी नहीं, बल्कि एक दूरबीन की तरह उपयोग करें।

Tagged:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *