आज के आधुनिक युग में मनुष्य के पास सुख-सुविधा के तमाम साधन मौजूद हैं। शानदार घर, महंगी गाड़ियाँ और तकनीक की हर सुख-सुविधा होने के बावजूद, एक चीज़ जिसकी कमी लगभग हर व्यक्ति महसूस कर रहा है, वह है—आत्मिक शांति। अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि “डॉ. साहब, सब कुछ होने के बाद भी मन अशांत क्यों रहता है?”
भगवत प्राप्ति संदेश दर्शन पत्रिका का मूल मंत्र है—“भाग्य नहीं, बल्कि सोच बदलेगी”। इसी सोच के साथ आज हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि कैसे हम अपने भीतर छिपी उस असीम शांति को जागृत कर सकते हैं।
1. मन की अशांति का मुख्य कारण क्या है?
अध्यात्म की गहराई में उतरने से पहले यह समझना जरूरी है कि शांति आखिर खोती क्यों है? हमारे शास्त्रों के अनुसार, मन की अशांति के तीन मुख्य कारण हैं:
- अत्यधिक अपेक्षाएँ: जब हम भविष्य के परिणामों से बहुत अधिक चिपक जाते हैं।
- अतीत का पछतावा: बीते हुए कल की गलतियों को बार-बार दोहराना।
- तुलना: दूसरों के जीवन को देखकर अपने जीवन की कमियां निकालना।
जब तक मन बाहरी दुनिया में खुशी तलाशेगा, वह अशांत रहेगा। शांति ‘बाहर’ नहीं, बल्कि ‘भीतर’ का विषय है।
2. प्रेमानंद जी महाराज के प्रसंग: शांति का सरल मार्ग
आज के समय में पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के विचार लाखों लोगों को नई दिशा दे रहे हैं। वे अक्सर कहते हैं कि “मनुष्य को केवल अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, फल भगवान पर छोड़ देना चाहिए।”
जब हम ‘शरणागति’ का भाव अपना लेते हैं, तो मन का बोझ आधा हो जाता है। आत्मिक शांति का अर्थ यह नहीं है कि आपके जीवन में समस्याएँ नहीं होंगी, बल्कि इसका अर्थ यह है कि उन समस्याओं के बीच भी आप विचलित नहीं होंगे। नाम जप (जैसे राधा नाम या राम नाम) का अभ्यास मन के विकारों को शांत करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।
3. ज्योतिष और मानसिक शांति का संबंध
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो ‘चंद्रमा’ हमारे मन का कारक है। यदि कुंडली में चंद्रमा पीड़ित हो या राहू-केतु के प्रभाव में हो, तो व्यक्ति बिना किसी कारण के भी अशांत महसूस करता है।
- उपाय: पूर्णिमा का उपवास, जल का अपव्यय रोकना और ध्यान (Meditation) चंद्रमा को बलवान बनाते हैं, जिससे मानसिक स्थिरता आती है।
4. ध्यान (Meditation): शून्य से साक्षात्कार
ध्यान का अर्थ केवल आँखें बंद करके बैठना नहीं है। ध्यान का अर्थ है स्वयं के प्रति जागरूक होना। प्रतिदिन मात्र 15 मिनट का मौन आपके मष्तिष्क की नसों को शांत करता है। जब आप अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आप वर्तमान क्षण (Present Moment) में जीने लगते हैं। यही वर्तमान में जीना ही निर्वाण या शांति का द्वार है।
5. निस्वार्थ सेवा: आनंद का स्रोत
अध्यात्म सिखाता है कि जो हम दूसरों को देते हैं, वही हमें वापस मिलता है। यदि आप अशांत हैं, तो किसी जरूरतमंद की मदद करके देखें। जब आप किसी के चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, तो आपके हृदय में एक दिव्य शांति का अनुभव होता है। यह सेवा भाव अहंकार को कम करता है और जहाँ अहंकार नहीं होता, वहाँ ईश्वर का वास होता है।
6. दैनिक दिनचर्या में अध्यात्म को कैसे उतारें?
आत्मिक शांति कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं है, यह एक निरंतर प्रक्रिया है।
- सुबह का समय: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कम से कम 10 मिनट अपने ईष्ट का स्मरण करें।
- स्वाध्याय: अच्छी पुस्तकें या भगवत प्राप्ति संदेश दर्शन जैसे आध्यात्मिक लेख पढ़ें।
- भोजन की शुद्धि: सात्विक भोजन मन को शांत रखता है।
निष्कर्ष
अंत में, याद रखें कि आपकी शांति आपके हाथ में है। परिस्थितियाँ कभी भी आपके अनुसार नहीं होंगी, लेकिन आपकी प्रतिक्रिया आपके नियंत्रण में है। अध्यात्म हमें वह शक्ति देता है जिससे हम संसार के तूफानों के बीच भी अडिग खड़े रह सकें।
“भाग्य के भरोसे बैठना छोड़िए, अपनी सोच बदलिए और शांति का अनुभव स्वयं कीजिए।”





